आखर प्रहरी डेस्क
भोजपुर जिले के आरा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या-45 स्थित बहिरो मोहल्ले में निजी जमीन पर कथित रूप से नाली और गली निर्माण को लेकर विवाद अब और तेज हो गया है। अधिवक्ता कुमार कौशलेंद्र द्वारा नगर आयुक्त को दिए गए आवेदन के बाद अब एक नया आवेदन सामने आया है, जिसमें उन्होंने कड़े शब्दों में प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि विवादित भूमि पर निर्माण कार्य नहीं रोका गया तो वे मामले को राज्य स्तर तक ले जाएंगे।
आवेदक का आरोप है कि उनकी निजी जमीन पर नगर निगम द्वारा सरकारी राशि खर्च कर पक्की नाली और गली का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि भूमि विवाद का मामला वर्षों से न्यायालय में लंबित है। उन्होंने दावा किया है कि संबंधित भूमि को लेकर उच्च न्यायालय पटना में भी वाद विचाराधीन है। संबंधित भूमि को लेकर माननीय उच्च न्यायलय पटना में द्वितीय अपीलवाद संख्या 231/2005 लंबित है। आवेदक ने कहा कि निचली अदालत का फैसला मेरे पक्ष में आने के बाद विपक्षी पार्टी पटना उच्च न्यायलय में गए है । पिछले 2020 में भी इसी तरह का कार्य होने का शिकायत करने के उपरांत रोक लगा था । अपने आवदेन में उन्होंने जिक्र करते हुवे कहा कि माननीय पटना उच्च न्यायलय में मामला होने के कारण कार्य रुकना चाहिए अन्यथा नगर आयुक्त को पार्टी बनाया जा सकता है।
“न्यायालय को चुनौती देने जैसा है यह कदम”
आवेदन में अधिवक्ता ने कहा है कि जिस जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है, उसके स्वामित्व को लेकर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। ऐसे में निर्माण कार्य कराना न केवल कानून की भावना के विपरीत है बल्कि न्यायालय की प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास भी माना जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति की निजी भूमि पर सरकारी धन खर्च कर निर्माण कराया जाता है तो यह प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं बल्कि सरकारी राशि के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला बन सकता है।
“2020 में भी हुआ था प्रयास, शिकायत पर रुका था काम”
आवेदन में उन्होंने बताया है कि संबंधित भूमि को लेकर न्यायालय में मामला लंबित है और इसके बावजूद निर्माण कार्य कराया जाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि वर्ष 2020 में भी इसी तरह निर्माण कराने का प्रयास हुआ था, जिसे शिकायत के बाद रोक दिया गया था।
अधिवक्ता ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर विवादित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
🔴 जब भूमि विवाद न्यायालय में लंबित है तो निर्माण की अनुमति किस आधार पर दी गई?
🔴 क्या निर्माण से पहले जमीन का सीमांकन और सत्यापन कराया गया?
🔴 यदि भूमि निजी साबित हुई तो सरकारी धन खर्च करने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
🔴 क्या नगर निगम के अधिकारियों ने राजस्व अभिलेखों की जांच की थी?
आरा नगर निगम का यह विवाद अब केवल नाली और गली निर्माण का मामला नहीं रह गया है। यह निजी संपत्ति के अधिकार, सरकारी धन के उपयोग और न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। अब सबकी निगाहें नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और विवाद का समाधान किस तरह निकालते हैं।
(नोट: यह आरोप आवेदनकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।)
अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

