Bihar Education Crisis: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं तय समय-सीमा पार करने के बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत, मॉडल स्कूलों का संचालन और लाखों शिक्षकों के तबादले जैसे बड़े फैसले फिलहाल अधूरे हैं। ऐसे में छात्र, शिक्षक और अभिभावक सरकार से जवाब मांग रहे हैं कि आखिर घोषित योजनाएं कब अमल में आएंगी।
सरकार ने 1 जुलाई से कई नई शैक्षणिक पहल शुरू करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अधिकांश योजनाएं अब भी तैयारियों के दौर में ही अटकी हुई हैं। जिन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा हुई थी, वहां शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी हैं। इसी तरह मॉडल स्कूलों का संचालन भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
सबसे अधिक चर्चा शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर है। करीब 5.80 लाख शिक्षकों के ट्रांसफर की प्रक्रिया जून के अंत तक पूरी करने का दावा किया गया था, लेकिन विभाग अभी तक रिक्त पदों का अंतिम ब्योरा तैयार नहीं कर पाया है। इसी वजह से रेशनलाइजेशन और ऑनलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
नए डिग्री कॉलेजों के संचालन के लिए हजारों शिक्षकों की आवश्यकता है। शुरुआत में स्कूलों के योग्य शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर कॉलेज भेजने की योजना बनाई गई थी, लेकिन विरोध के बाद विभाग को फैसला वापस लेना पड़ा। इसके बाद शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी और कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य अधूरा रह गया।
राज्य के सभी जिलों में मॉडल स्कूल स्थापित करने की योजना भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी। शिक्षकों के चयन के लिए पहले तय किए गए कड़े मानकों के कारण पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार नहीं मिले। बाद में पात्रता की शर्तें आसान की गईं, लेकिन इसके बावजूद आवश्यक संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हो सके। परिणामस्वरूप किसी भी मॉडल स्कूल में नियमित कक्षाएं शुरू नहीं हो सकीं।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता और रिक्त पदों के अद्यतन आंकड़ों का अभाव है। कई विद्यालयों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि अनेक स्कूल अब भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इसी असंतुलन के कारण नई योजनाओं को समय पर लागू करना चुनौती बन गया है।
हालांकि शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का कहना है कि शिक्षकों के स्थानांतरण की नई नीति को मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है। विभाग तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने में जुटा है तथा ट्रांसफर, मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेजों से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर ली जाएंगी।
फिलहाल हकीकत यही है कि तय समय-सीमा बीत चुकी है, लेकिन शिक्षा विभाग की कई बड़ी घोषणाएं अभी भी अमल का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि लाखों छात्र, शिक्षक और अभिभावक शिक्षा व्यवस्था में सुधार के वादों के जल्द पूरा होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

