प्रतिबंधित सामग्री मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराने, सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने और बंदियों के परिजनों को नियम विरुद्ध प्रवेश दिलाने के आरोपों के बाद सरकार ने की कार्रवाई।
गया: गया केंद्रीय कारा में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों के बाद जेल उपाधीक्षक (प्रशासन) सुदर्शन प्रसाद सिंह को राज्य सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने मामले में आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को केंद्रीय कारा के वार्ड संख्या 23/4 में तलाशी अभियान के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से प्रतिबंधित मादक पदार्थ (गांजा) बरामद किया गया था। आरोप है कि जेल अधीक्षक ने इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया था, लेकिन उपाधीक्षक ने आदेश का पालन नहीं किया। इसे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और प्रशासनिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना गया।
जांच में यह भी सामने आया कि उपाधीक्षक पर जेल में बंदियों के परिजनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रवेश दिलाने के आरोप हैं। बताया गया है कि कई लोगों को अपना परिचित या रिश्तेदार बताकर कार्यालय कक्ष तक बुलाया जाता था और तय समय से अलग मुलाकात कराई जाती थी। इस दौरान सुरक्षा जांच, गेट रजिस्टर और अन्य अनिवार्य प्रक्रियाओं का भी कथित रूप से पालन नहीं किया गया, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब जेलकर्मी सुरक्षा मानकों के अनुरूप तलाशी या जांच की कार्रवाई करते थे, तब उनके साथ उपाधीक्षक का व्यवहार भी कथित रूप से अनुचित और धमकीपूर्ण रहता था। इससे जेल कर्मचारियों के बीच असहजता और दबाव का माहौल बनने की बात भी जांच रिपोर्ट में कही गई है।
कारा प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है क्योंकि गया केंद्रीय कारा नक्सली और संगठित अपराध से जुड़े कई कुख्यात बंदियों के कारण संवेदनशील श्रेणी में आता है। ऐसे संस्थान में सुरक्षा नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता पूरे जेल प्रशासन के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
विभागीय जांच रिपोर्ट में उपाधीक्षक के आचरण को कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, अनुशासनहीनता तथा पद की गरिमा के विपरीत बताया गया है। इन्हीं आधारों पर राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि जेल के भीतर नियमों के उल्लंघन का यह कथित सिलसिला कब से चल रहा था और इसमें अन्य किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका तो नहीं रही।
रिपोर्ट: सुबी सिंह

