भोजपुर ! बीरेंद्र कुमार
चांदी (बिहार)। भारत की आजादी की लड़ाई में देश के कोने-कोने से हजारों ऐसे वीर सपूत सामने आए, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन्हीं गुमनाम वीरों में चांदी निवासी सूर्यदेव कुमार का नाम भी स्थानीय लोगों और उनके परिजनों द्वारा सम्मान के साथ लिया जाता है।
परिवार और स्थानीय लोगों के अनुसार, सूर्यदेव कुमार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए थे और अंग्रेजी शासन के अत्याचारों का डटकर विरोध करते थे। उस दौर में जब अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाना भी अपराध माना जाता था, तब उन्होंने मातृभूमि की आजादी को सर्वोपरि मानते हुए संघर्ष का रास्ता चुना।
बताया जाता है कि अंग्रेजों के साथ संघर्ष के दौरान चांदी में ही उन पर हमला किया गया। देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका बलिदान इस क्षेत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
आज उनके परिवार में उनके पुत्र शिव प्रसाद जी मौजूद हैं। इस बाबत शिव शिष्य परिवार के बीरेंद्र जी ने बताया कि आगामी 8 अगस्त को कोइलवर स्थित कपिलदेव चौक पर उनकी याद में एक शहादत दिवस मनाने जा रहे है । बीरेंद्र कुमार के भाई सुरेंद्र कुमार उर्फ छोटेलाल ने आखर प्रहरी न्यूज़ को बताया कि परिवार अपने पूर्वज के संघर्ष और बलिदान की स्मृतियों को सहेजकर रखे हुए है। उनका कहना है कि सूर्यदेव कुमार ने कभी अपने व्यक्तिगत हितों को महत्व नहीं दिया, बल्कि देश की आजादी को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य माना।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे अनेक नायक इतिहास की मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान नहीं पा सके। इसलिए उनके जीवन और योगदान का दस्तावेजीकरण होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने क्षेत्र के उन वीरों को जान सकें जिन्होंने स्वतंत्र भारत के निर्माण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर हमें केवल उत्सव मनाने का संदेश नहीं देते, बल्कि उन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने की प्रेरणा भी देते हैं, जिनके बलिदान की बदौलत आज हम स्वतंत्र भारत में खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
आखर प्रहरी न्यूज़ ऐसे गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और योगदान को सामने लाने का प्रयास करता रहेगा, ताकि उनके संघर्ष और बलिदान को आने वाली पीढ़ियां भी जान सकें।
(संपादकीय टिप्पणी: यह समाचार परिवारजनों एवं स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। यदि भविष्य में इस संबंध में सरकारी अभिलेख, स्वतंत्रता सेनानी प्रमाणपत्र या अन्य ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो समाचार को अद्यतन किया जाएगा।)

